फ्रेंडशिप डे जो दोस्तों के लिए बनाया गया हे । सच कहू तो thopa गया अंधी आधुनिकता वादिय द्वारा .अब तो शायद ही कोई होगा जो इस दिन को न मनाता हो वो चाहे विरोध प्रदर्शन के जरिये हो या फिर ख़ुशी का इजहार करके.जो विरोध करते हे वो कहते हे ये हमारी संस्कृति के खिलाफ हे और जो मनाते हे उनका कहना हे की कोई एक दिन तय होना चाहिए. आज की फास्ट laif में किसी को फुर्सत नही की दो चार दिन किसी त्यौहार को मनाने के लिए
इसे hi विचारो का द्वंद्व कहेंगे .सोचने की बात ये he की कि क्या आधुनिकता का जामा पहनाकर या भारतीय संस्कृति का नाम देकर कब तक हम swechchha से कोई फैसला क्यों नही लेते क्यों किसी का अन्धानुकरण बिना तर्क कि कसौटी पर करे अपना लेते he .अगर मेरी बात कीजे तो में उनके साथ हु जो तर्कों से अपनी बात रखते he वैसे दोनों पक्षों को मेरी शुभ कामनाये.
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