Saturday, 31 July 2010

फ्रेंडशिप डे जो दोस्तों के लिए बनाया गया हे । सच कहू तो thopa गया अंधी आधुनिकता वादिय द्वारा .अब तो शायद ही कोई होगा जो इस दिन को न मनाता हो वो चाहे विरोध प्रदर्शन के जरिये हो या फिर ख़ुशी का इजहार करके.जो विरोध करते हे वो कहते हे ये हमारी संस्कृति के खिलाफ हे और जो मनाते हे उनका कहना हे की कोई एक दिन तय होना चाहिए. आज की फास्ट laif में किसी को फुर्सत नही की दो चार दिन किसी त्यौहार को मनाने के लिए
इसे hi विचारो का द्वंद्व कहेंगे .सोचने की बात ये he की कि क्या आधुनिकता का जामा पहनाकर या भारतीय संस्कृति का नाम देकर कब तक हम swechchha से कोई फैसला क्यों नही लेते क्यों किसी का अन्धानुकरण बिना तर्क कि कसौटी पर करे अपना लेते he .अगर मेरी बात कीजे तो में उनके साथ हु जो तर्कों से अपनी बात रखते he वैसे दोनों पक्षों को मेरी शुभ कामनाये.

Friday, 30 July 2010

वाह सचिन वाह वैसे तुमको साबित करने को कुछ बचा तो हे नही लेकिन तुम्हारी इस इन्निंग के बाद अब तो उन लोगो के गाल पर जोर दर थप्पड़ पड़ा होगा जो तुम्हारे रिटायर्मेंट की बात करते हे उन्हें बताने के लिए ये पर्याप्त हे की जब समय आएगा तो पता लगेगा की सचिन की कमी क्या होती हे .tum यु ही खेलते रहो शायद ये निक्कमी सरकार तुम्हे भारत रत्न दे देउसे नही मालूम की बहुत कम लोगो ने ही इतनी कम उम्र में इतनी नाम कमाया हेचलो छोडो भैस के आगे बीन बजने से कोई फायदा नही हे .tum वास्तव में भारत रत्न हो .रैना तुम ऐसे ही रन बनाते रहना .सफलता को इंजॉय जरुर करो लेकिन मदहोशी में खोना नही अपने साथी की tarah

Thursday, 29 July 2010

मध्यप्रदेश में बीजेपी की हालत ऐसी हो गयी जैसे धोबी का कुत्ता जो बेचारा नातो ghar का रहा न घाट का शिवराज तो बस नाम का ही शिवराज रह गया हे .कोई उन्हें बताये के आपकी नाम मात्र की ghoshnao से एमपी का विकास संभव नही हे , जरा अपने gale के सांप को देखे वो अब आस्तीन का सांप हो गया हे , आपके पिछले कार्यकाल में भले he काम हुआ हो ठीक उसी तरह जैसे नए युवक का जोश जो शुरू में मेहनत से काम करता हे लेकिन पाव जमने के बाद आलसी हो जाता हे आपके मंत्रियो ने भी पहले yahe किया पहले कार्यकाल में काम किया और अब घोटालो पर घोटाले कर रहे हे ,। आखिर कब तक आप इनका पक्ष लेंगे .हमे तो लग रहा हे आप बर गया हे सीem साहब आपको देखकर तो लगता की आपको खतरा bhumafiya से नही बल्कि अपने मंत्रियो से हे .अगर आपके अंदर हिम्मत होती तो उनको तत्काल प्रभाव से निलंबित कर देते लेकिन आपने तो हद ही कर दी उन्हें हटाने की बजाय उनका पक्ष ले लिया शायद आपको डर हे की आप ज्यादा टोकाटाकी करोगे तो नितिन जी हे उपर आपके जिनको बोलने की तमीज भी नही हे .सभी एक ही ठेली के चट्टे बट्टे हो.