१२० करोड़ रूपये का नुकसान, २१ दिनों तक संसद स्थगित रहना, सरकार का कहना था २ ji स्पेक्ट्रम में कुछ नही जो जे पि सी के जाँच कराई जाय.और अगले ही बजट सत्र में जे पि सी की मांग मंजूर करना इसे क्या कहा जायेगा ? मेरी नजर में तो इसे थूक कर चाटना कहते हे .घोटालो से लबरेज केंद्र सरकार की इसे एक और नाकामयाबी कहेंगे . मै तो इसे एक और घोटालो कहूँगा या यु कहे तो सीधे तोर से जनता से किया गया धोखा हे. पिछले ब्लॉग मै मेने कहा भी था की कुछ एसा ही होगा जो सहi साबित हुआ . अब फिर से जनता जनार्दन ये देखेगी की जाँच के दोरान सामने आयेगा कि कागजात खो गए या गायब हो गए हे .
दरअसल ये कांग्रेस कि एक साजिश रहती हे जिसका एकमात्र उद्देश्य जनता को गुमराह करना हे . विपक्ष को मेरी और से बधाई कि उसकी मांग पूरी हुई. मै अपेक्षा करूँगा कि आगे भी अपनी सक्रीय भूमिका निभाते रहेंगे. सरकार कि मंशा साफ नजर आ रही हे कि वो केवल अपने अयोग्य हो चुके नेताओ से खुद त्रस्त हे और शायद वे उसकी गले कि हड्डी बने हे. इससे साफ तोर से जाहिर होता हे कि कांग्रेस के अंदर कुछ न कुछ गड़बड़ झाला चल रहा हे. ये वही कांग्रेस हे जो एसे पार्टी के रूप मे जनि जाती रही हे जिसमे बड़ा से बड़ा नेता और छोटा से छोटा सदस्य जनता का सेवक रहा हे .लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य मे तो सब खुदगर्ज हो गए हे .
बहरहाल शुक्र हे सरकार सबकुछ लीपापोती करने ,और कोर्ट के लगातार पड़ रही लताड़ व मिडिया के जोरदार तमाचो के बाद कुम्भ्करनी निद्रा से जगी हे. देखना होगा कि सरकार कब तक जगी रहेगी.....
dvandv aaj ka
Wednesday, 23 February 2011
Tuesday, 11 January 2011
public he sab janti he
२0१० अगर याद किया जाय तो यह कहा जा सकता हे की यह साल निश्चित ही अपने aap में विशेष रहा. पिछले साल ऐसी घटनाये हुई जो की आम आदमी से तो जुडी रही मगर इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से सरकार से सवाल जवाब किये और अपने निर्णय दिए वो काफी कर्णप्रिय रहे.फिर चाहे वो कामनवेल्थ खेल हो,आदर्श सोसाइटी घोटाला हो या नोकरशाह की अयोध्या फैसले पैर रोक हो,सभी पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणियों ने आम आदमी को ऐसा महसूस कराया की जैसे आम आदमी ही बोल रहा हो, एक बात गौरतलब रही की सरकार भी इससे सकते में आई दिखी .लेकिन एक कहावत हे की कुत्ते की पूछ कभी सीधी नहीं होती.
सरकार जिस तरह से जनता को चुटिया बनती हे ऐसा लगता हे जैसे जनता कुछ समझती नहीं हे. कोई ये बताएगा की आखिर सभी घोटालो में मंत्रियो के नाम आने के बाद सरकार तुरंत ऍफ़ आई आर क्यों नही करती .वाही कम तब किया जाता हे जब पूरी प्रक्रिया को अपने ढंग से निपटा लेते हे और फिर खबर आती हे की दस्तावेग गायब हो गए. आखिरकार कागजात गाएब हुए कैसे, किसने गायब किये कोण बताएगा इसके बारे में जनाब .
हमारी न्याय प्रणाली पर भी आरोप लग रहे हे अब क्या करे आम इंसान. कुछ भी एक बात समझ में आती हे की जिस तरह ये भ्रस्टाचार मचा हे उसके मुताबिक अब भ्रस्टाचार को संवेधानिक अधिकार बना देना चाहिए,किसीने सही कहा था की सभी कामो के लिए घूस निर्धारित कर देना चाहिए .कम से कम जनता पहले से ही मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहेगी. सरकार यदि साफ हे तो उसे क्या आपत्ति हे जेपीसी के सामने आने में,जितना नाटक लोक सभा में हुआ आkhiर करोडो रूपये बर्बाद हुए लेकिन सरकार को अपने झूठे सम्मान की चिंता हे. शायद इसकी भी सूचना कुछ दिनों में मिले की कागजात गायब हो गए या टोल मोल करके झूठा नाटक हो.हमारा विपक्ष भी एकदम लाजवाब हे.अब क्यों नहीं हो हल्ला मचा रही हे चुकी उसके shasankal में ही इनकी shuruaat हो गयी थी.
मेरे कहने का आशय मात्र इतना हे की सब एक ही थैली क chatte batte हे .दुखद ये हे की न्यायपालिका भी अब भ्रस्टाचार में लिप्त हे अब क्या होगा इस देश का ....मुझे यकीन हे की हमारी युवा शक्ति इस भ्रस्रtachar को ख़त्म करने में अपना अतुलनीय योगदान देगा .हमें ही इंडिया को भारत बनाना होगा .इस पर एक शेर खूब कहा गया हे...शाखाओ से टूट कर गिर जाय वो पत्ते हम नही ,तुफानो से कह दो अपनी ओकात में रहे...
मै आशा करता हूँ की आपका भविष्य उज्जवल हो निर्मल हो आपकी सभी शुभ इच्छाए पूरी हो.नव वर्ष मंगलमय हो .कृपया अपने विचार अवश्य दे.
Saturday, 16 October 2010
Friday, 1 October 2010
Aakhirkar lambi jaddojahad ke bad hamari nyay palika ne der se hi sahi lekin faisla to de diya . mai ummed karta hu ki aaj ke faisle ke bad shayad kuchh charampanthiyo ko chhod kr baki logo ko faisla kubool hoga. 60 salo tk chale is aastha se jude mudde pr desh duniya ke tamam logo ki najar rahi . halaki abhi apeel ke liya partiis Supreem court ja sakti he.
is doran kuchh bate gour karne vali rahi jin pr meri hi tarah bahot se logo ne socha hoga .ab vakt aa gaya he ki desh ke logo ko is bare me bhi sochana hoga ki aise halat me kya kiya jay .
1-lagbhag ek mahine se jis tarah se Media ka rukh raha he [khaskr electronik media ka] use dekh kr to koi bhi ye manne ko teyaar nahi ho sakta ki ye loktantra ka chautha stambh hone layak he?. prashn ye uthta he ki kya in jaise samvednsheel muddo pr bhi inki manavta ka aisa nanga nach yu hi jari rahega?
aakhir kb tk media sirf t r p ke liye aise samacharon ko bhayanak tarike se parosega?MEDIA ko ye dhayan me rakhna chahiye ki uske program sidhe logo se jude or impactful hote he.
2-abhi kuchh dino se jaisi surksha intjam kiye gaye he pure desh me kya aise hi intjam hamesha nhi ho sakte ?
aaj jaisi javano ki mustaidi ,officers ki moujudgi hamesh nhi ho sakti?
aaj jis tarah logo ko ye ahsas karaya ja raha he ki aap surakshit he ,aise hr din kyo nhi ho sakta ?
3-gour talab he ki pichhle kuchh dino me jaisa samanjasy kendr- or rajyo ke beech dekhne ko mila he ,vaisa hamesha kyo nhi, khas kr ek dusre ke upr aarop lagane vali ye parti or sarkare km se km suraksha ke bare me ek kyo nhi ho pati he?
4-aam aadmi ne jaisi jagrukta ab tk dikhayi he ,vaise hi hamesha kyo nhi?
5-aakir kb hamari nyay vyavastha jaldi faisla degi?aagr kisi ko jeete ji nyay nhi milta to us nyay ka kaisa ochitya ?
6-kya aisa kuchh naya nhi kiya ja sakta ki vishes prakar ke mukadmo jaise Kasab.,ayodya or dusre ?
in muddo pr hm sabhi ko sochane ki jarurat he. lekin un logo ko jyada sochne ki jarurat he jo aaj satta me he ya ,jimmedar he ,sabhi ko apne svartho se upr uthkr sochne ki jarurt he ...vrna vo din door nhi jb aam aadmi jagega or un logo capplon se pitega jo siyasat ,dharm ke khud ko thekedar samjhte he.
desh ko aage badhane me sahyog kre
muje Bhartiy hone pr garv he
Saturday, 31 July 2010
फ्रेंडशिप डे जो दोस्तों के लिए बनाया गया हे । सच कहू तो thopa गया अंधी आधुनिकता वादिय द्वारा .अब तो शायद ही कोई होगा जो इस दिन को न मनाता हो वो चाहे विरोध प्रदर्शन के जरिये हो या फिर ख़ुशी का इजहार करके.जो विरोध करते हे वो कहते हे ये हमारी संस्कृति के खिलाफ हे और जो मनाते हे उनका कहना हे की कोई एक दिन तय होना चाहिए. आज की फास्ट laif में किसी को फुर्सत नही की दो चार दिन किसी त्यौहार को मनाने के लिए
इसे hi विचारो का द्वंद्व कहेंगे .सोचने की बात ये he की कि क्या आधुनिकता का जामा पहनाकर या भारतीय संस्कृति का नाम देकर कब तक हम swechchha से कोई फैसला क्यों नही लेते क्यों किसी का अन्धानुकरण बिना तर्क कि कसौटी पर करे अपना लेते he .अगर मेरी बात कीजे तो में उनके साथ हु जो तर्कों से अपनी बात रखते he वैसे दोनों पक्षों को मेरी शुभ कामनाये.
इसे hi विचारो का द्वंद्व कहेंगे .सोचने की बात ये he की कि क्या आधुनिकता का जामा पहनाकर या भारतीय संस्कृति का नाम देकर कब तक हम swechchha से कोई फैसला क्यों नही लेते क्यों किसी का अन्धानुकरण बिना तर्क कि कसौटी पर करे अपना लेते he .अगर मेरी बात कीजे तो में उनके साथ हु जो तर्कों से अपनी बात रखते he वैसे दोनों पक्षों को मेरी शुभ कामनाये.
Friday, 30 July 2010
वाह सचिन वाह वैसे तुमको साबित करने को कुछ बचा तो हे नही लेकिन तुम्हारी इस इन्निंग के बाद अब तो उन लोगो के गाल पर जोर दर थप्पड़ पड़ा होगा जो तुम्हारे रिटायर्मेंट की बात करते हे उन्हें बताने के लिए ये पर्याप्त हे की जब समय आएगा तो पता लगेगा की सचिन की कमी क्या होती हे .tum यु ही खेलते रहो शायद ये निक्कमी सरकार तुम्हे भारत रत्न दे दे। उसे नही मालूम की बहुत कम लोगो ने ही इतनी कम उम्र में इतनी नाम कमाया हे । चलो छोडो भैस के आगे बीन बजने से कोई फायदा नही हे .tum वास्तव में भारत रत्न हो .रैना तुम ऐसे ही रन बनाते रहना .सफलता को इंजॉय जरुर करो लेकिन मदहोशी में खोना नही अपने साथी की tarah
Thursday, 29 July 2010
मध्यप्रदेश में बीजेपी की हालत ऐसी हो गयी जैसे धोबी का कुत्ता जो बेचारा नातो ghar का रहा न घाट का शिवराज तो बस नाम का ही शिवराज रह गया हे .कोई उन्हें बताये के आपकी नाम मात्र की ghoshnao से एमपी का विकास संभव नही हे , जरा अपने gale के सांप को देखे वो अब आस्तीन का सांप हो गया हे , आपके पिछले कार्यकाल में भले he काम हुआ हो ठीक उसी तरह जैसे नए युवक का जोश जो शुरू में मेहनत से काम करता हे लेकिन पाव जमने के बाद आलसी हो जाता हे आपके मंत्रियो ने भी पहले yahe किया पहले कार्यकाल में काम किया और अब घोटालो पर घोटाले कर रहे हे ,। आखिर कब तक आप इनका पक्ष लेंगे .हमे तो लग रहा हे आप बर गया हे सीem साहब आपको देखकर तो लगता की आपको खतरा bhumafiya से नही बल्कि अपने मंत्रियो से हे .अगर आपके अंदर हिम्मत होती तो उनको तत्काल प्रभाव से निलंबित कर देते लेकिन आपने तो हद ही कर दी उन्हें हटाने की बजाय उनका पक्ष ले लिया शायद आपको डर हे की आप ज्यादा टोकाटाकी करोगे तो नितिन जी हे उपर आपके जिनको बोलने की तमीज भी नही हे .सभी एक ही ठेली के चट्टे बट्टे हो.
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