Wednesday, 23 February 2011

१२० करोड़ रूपये का नुकसान, २१ दिनों तक संसद स्थगित रहना, सरकार का कहना था २ ji स्पेक्ट्रम में कुछ नही जो जे पि सी के जाँच कराई जाय.और अगले ही बजट सत्र में जे पि सी की मांग मंजूर करना इसे क्या कहा जायेगा ? मेरी नजर में तो इसे थूक कर चाटना कहते हे .घोटालो से लबरेज केंद्र सरकार की इसे एक और नाकामयाबी कहेंगे . मै तो इसे एक और घोटालो कहूँगा या यु कहे तो सीधे तोर से जनता से किया गया धोखा हे. पिछले ब्लॉग मै मेने कहा भी था की कुछ एसा ही होगा जो सहi साबित हुआ . अब फिर से जनता जनार्दन ये देखेगी की जाँच के दोरान सामने आयेगा कि कागजात खो गए या गायब हो गए हे .
दरअसल ये कांग्रेस कि एक साजिश रहती हे जिसका एकमात्र उद्देश्य जनता को गुमराह करना हे . विपक्ष को मेरी और से बधाई कि उसकी मांग पूरी हुई. मै अपेक्षा करूँगा कि आगे भी अपनी सक्रीय भूमिका निभाते रहेंगे. सरकार कि मंशा साफ नजर आ रही हे कि वो केवल अपने अयोग्य हो चुके नेताओ से खुद त्रस्त हे और शायद वे उसकी गले कि हड्डी बने हे. इससे साफ तोर से जाहिर होता हे कि कांग्रेस के अंदर कुछ न कुछ गड़बड़ झाला चल रहा हे. ये वही कांग्रेस हे जो एसे पार्टी के रूप मे जनि जाती रही हे जिसमे बड़ा से बड़ा नेता और छोटा से छोटा सदस्य जनता का सेवक रहा हे .लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य मे तो सब खुदगर्ज हो गए हे .
बहरहाल शुक्र हे सरकार सबकुछ लीपापोती करने ,और कोर्ट के लगातार पड़ रही लताड़ व मिडिया के जोरदार तमाचो के बाद कुम्भ्करनी निद्रा से जगी हे. देखना होगा कि सरकार कब तक जगी रहेगी.....

Tuesday, 11 January 2011

public he sab janti he

२0१० अगर याद किया जाय तो यह कहा जा सकता हे की यह साल निश्चित ही अपने aap में विशेष रहा. पिछले साल ऐसी घटनाये हुई जो की आम आदमी से तो जुडी रही मगर इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से सरकार से सवाल जवाब किये और अपने निर्णय दिए वो काफी कर्णप्रिय रहे.फिर चाहे वो कामनवेल्थ खेल हो,आदर्श सोसाइटी घोटाला हो या नोकरशाह की अयोध्या फैसले पैर रोक हो,सभी पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणियों ने आम आदमी को ऐसा महसूस कराया की जैसे आम आदमी ही बोल रहा हो, एक बात गौरतलब रही की सरकार भी इससे सकते में आई दिखी .लेकिन एक कहावत हे की कुत्ते की पूछ कभी सीधी नहीं होती.
सरकार जिस तरह से जनता को चुटिया बनती हे ऐसा लगता हे जैसे जनता कुछ समझती नहीं हे. कोई ये बताएगा की आखिर सभी घोटालो में मंत्रियो के नाम आने के बाद सरकार तुरंत ऍफ़ आई आर क्यों नही करती .वाही कम तब किया जाता हे जब पूरी प्रक्रिया को अपने ढंग से निपटा लेते हे और फिर खबर आती हे की दस्तावेग गायब हो गए. आखिरकार कागजात गाएब हुए कैसे, किसने गायब किये कोण बताएगा इसके बारे में जनाब .
हमारी न्याय प्रणाली पर भी आरोप लग रहे हे अब क्या करे आम इंसान. कुछ भी एक बात समझ में आती हे की जिस तरह ये भ्रस्टाचार मचा हे उसके मुताबिक अब भ्रस्टाचार को संवेधानिक अधिकार बना देना चाहिए,किसीने सही कहा था की सभी कामो के लिए घूस निर्धारित कर देना चाहिए .कम से कम जनता पहले से ही मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहेगी. सरकार यदि साफ हे तो उसे क्या आपत्ति हे जेपीसी के सामने आने में,जितना नाटक लोक सभा में हुआ आkhiर करोडो रूपये बर्बाद हुए लेकिन सरकार को अपने झूठे सम्मान की चिंता हे. शायद इसकी भी सूचना कुछ दिनों में मिले की कागजात गायब हो गए या टोल मोल करके झूठा नाटक हो.हमारा विपक्ष भी एकदम लाजवाब हे.अब क्यों नहीं हो हल्ला मचा रही हे चुकी उसके shasankal में ही इनकी shuruaat हो गयी थी.
मेरे कहने का आशय मात्र इतना हे की सब एक ही थैली क chatte batte हे .दुखद ये हे की न्यायपालिका भी अब भ्रस्टाचार में लिप्त हे अब क्या होगा इस देश का ....मुझे यकीन हे की हमारी युवा शक्ति इस भ्रस्रtachar को ख़त्म करने में अपना अतुलनीय योगदान देगा .हमें ही इंडिया को भारत बनाना होगा .इस पर एक शेर खूब कहा गया हे...शाखाओ से टूट कर गिर जाय वो पत्ते हम नही ,तुफानो से कह दो अपनी ओकात में रहे...
मै आशा करता हूँ की आपका भविष्य उज्जवल हो निर्मल हो आपकी सभी शुभ इच्छाए पूरी हो.नव वर्ष मंगलमय हो .कृपया अपने विचार अवश्य दे.